রবিবার, ২৫ আগস্ট ২০১৯
Sunday, 05 May, 2019 01:02:10 pm
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फिर भी मैं उसकी राह देख रहा हूं

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फिर भी मैं उसकी राह देख रहा हूं


लेखक: जहाँगीर हुसैन (पूर्व सेना अधिकारी)

मैं पंखों के फंदे में झूल गया
आसमानी मक्खी मक्खी का शौक
फ्लाइंग लिगा, जब भी पंखा झलता है
उस तरह से नहीं मिल सकता है

कितने सपने, कितने सपने
रंग को रंगना मत भूलना
बाज
फैन गोटैया, राखी रे

बड़ी माया, बड़ा सुख
मन का बरामदा, रोता हुआ
चारों ओर, बहुत खुशी
उड़ नहीं सकता, किरण किसी के साथ

फिर भी सूरज, फिर भी चाँद
उठो और फिर से डूबो
मुझे याद है, मुझे याद है
मुझे नहीं पता कि वह कब पास आएगा, रे।

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Editor: Habibur Rahman
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